वकौल कुलवंत -    कुलवंत हैप्पी  ने  27 अक्टूबर 1984 को श्री हेमराज शर्मा के घर स्व. श्रीमती कृष्णादेवी की कोख से जन्म लिया। जन्म के वक्त इनका  नाम कुलवंत राय रखा गया, और प्यार का नाम हैप्पी। लेकिन आगे चलकर इन्होनें दोनों नामों का विलय कर दिया "कुलवंत हैप्पी"। तब ये  हरियाणा के छोटे से गाँव दारेआला में रहते थे। इस गांव में इन्हें  थोड़ी थोड़ी समझ आई। इस गाँव से शहर बठिंडा तक का रास्ता नापा और इस शहर में गुजारे कुछ साल इन्होनें। शहर से फिर कदम गाँव की ओर चले.लेकिन इस बार गाँव कोई और था.इनका पुश्तैनी गांव..जहां इनके  दादा परदादा रहा करते थे, जिस गाँव की गलियों खेतों में खेलते हुए इनके  पिता जवान हुए। वो ही गांव जिस गाँव हीरके (मानसा) में इनकी  मां दुल्हन बन आई थी। यहां पर इन्होनें दसवीं कक्षा तक जमकर की पढ़ाई और खेती। इस गांव से फिर पहुंचा, उसी शहर जिसको छोड़ा था, कुछ साल पहले। 27 जुलाई 2000 को दैनिक जागरण के साथ जुड़ा, मगर कमबख्त शहर ने इन्हें  फिर धक्के मारकर निकाल दिया और ये  पहुंच गए छोटी मुम्बई बोले तो इंदौर। इस यात्रा दौरान दैनिक जागरण, पंजाब केसरी दिल्ली, सीमा संदेश, ताज-ए-बठिंडा हिंदी समाचार पत्रों में काम किया, इसके अलावा सीनियर इंडिया, नैपट्यून पत्रिकाओं में लेख प्रकाशित हुए और 27 दिसंबर 2006 से वेबदुनिया.कॉम के पंजाबी संस्करण को संवारने में लगे हुए हैं ।ब्लोगोत्सव-२०१० में ये लेकर उपस्थित हैं अपनी दो कविताएँ -

किसान


फटे पुराने
मैले से कपड़े
टूटे जूते
मैले से जख्मी पैर
कंधे पर रखा परना
ढही सी पगड़ी
अकेले ही खुद से बातें
करता जा रहा है
शायद
मेरे देश का कोई किसान होगा।

टुकड़े

बचपन में
जब एक रोटी थी,
तो माँ ने दो टुकड़े कर दिए,
एक मेरा, और एक भाई का
लेकिन जब हम जवान हुए,
तो हमने घर के दो टुकड़े कर दिए
एक पिता का, और एक मेरी माई का।


9 comments:

संजय भास्‍कर ने कहा… 23 अप्रैल 2010 को 3:52 pm

बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
ढेर सारी शुभकामनायें.

संजय कुमार
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

संजय भास्‍कर ने कहा… 23 अप्रैल 2010 को 3:53 pm

KULWANT JI ACHE WRITER HONE KE SATH BAHUT HI ACAHE INSAAN HAI..

कडुवासच ने कहा… 23 अप्रैल 2010 को 4:10 pm

...दोनो ही रचनाएं प्रसंशनीय हैं ... बधाई !!

रश्मि प्रभा... ने कहा… 23 अप्रैल 2010 को 5:09 pm

दोनों ही रचनाएँ प्रभावशाली

Himanshu Pandey ने कहा… 23 अप्रैल 2010 को 5:59 pm

सुन्दर रचनाएं !आभार ।

मनोज कुमार ने कहा… 23 अप्रैल 2010 को 8:26 pm

दो व्‍यक्तियों (भाइयों) में से अगर एक झगड़ा न करें, तो झगड़ा हो ही नहीं सकता।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा… 23 अप्रैल 2010 को 8:39 pm

दोनों रचनाएँ प्रभाव छोडती हुई.....

vandan gupta ने कहा… 24 अप्रैल 2010 को 11:03 am

कुलवंत जी बधाई………………………"टुकडे " ने तो दिल के टुकडे-टुकडे कर दिये।

कुलवंत हैप्पी ने कहा… 3 मई 2010 को 10:19 am

आप सब का धन्यवाद जी, और परिकल्पना टीम का शुक्रगुजार हूँ, जिसने नाचीज को इसमें स्थान दिया।

 
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