तुम्हारे नाम
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लोग हमारे रिश्ते को
एक नाम देकर
निश्चिन्त होना चाहते हैं .

वो जानते हैं
रिश्तों के दायरे होते हैं
और दायरों में
पड़ा इंसान खतरनाक नहीं होता .

उन्हें परेशानी है
तुम्हारी ललाट पे पड़े जुल्फों से
तुम्हारी शोख चाल से .

उन्हें उलझन है
तुम्हारी धीमी मुस्कराहट से
जैसे तुम कुछ कह रही हो
सुन रही हो .

उन्हें परेशानी है
मेरे बेख़ौफ़ तुम्हारे घर आने से ,
घंटों तुम्हारी तस्वीर पे नज़रें टिकाये रहने से ..

वो जानना चाहते हैं ,
हमारा रिश्ता ,
चाहते हैं
एक नाम देकर निश्चिन्त हो जाना .

उनसे कहो
पूछें जाकर
चकोर से ,
समुद्र की लहरों से ,
क्या है उनका
रिश्ता चाँद से .

मगर ये बेचारे भी क्या करें ?

कुछ रिश्ते
बस अनाम होते हैं
बस होते हैं
और इनके नाम नहीं होते ....



सुमन सिन्हा
http://zindagikhwaabhai.blogspot.com/



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13 comments:

Dr. Zakir Ali Rajnish ने कहा… 31 मई 2010 को 12:53 pm

Sachmuch.Har rishte ko naam dena zaruri bhi to nahee.

रश्मि प्रभा... ने कहा… 31 मई 2010 को 1:10 pm

जिन रिश्तों के नाम होते हैं
वे खोखले अधिक होते हैं
अनाम रिश्ते जो अँधेरे में भी हाथ पकड़ लेते हैं
उसकी भाषा आम आदमी की सोच से परे होती है

vandan gupta ने कहा… 31 मई 2010 को 3:40 pm

bahut hi sahi kaha hai......kuch anam rishtey naam walon se behtar hote hain.

खोरेन्द्र ने कहा… 31 मई 2010 को 3:53 pm

bahut achchhi kavita hain

Urmi ने कहा… 31 मई 2010 को 3:58 pm

बहुत सुन्दर कविता है! पढ़कर बहुत अच्छा लगा!

सुनील गज्जाणी ने कहा… 31 मई 2010 को 4:17 pm

सुमन जी ,
प्रणाम !
सुंदर अभिव्यक्ति के लिए आप को साधुवाद .आप की कविता से मुझे अपनी एक छोटी सी कविता याद आय गयी .
रिश्ते खड़े के पानी सा भी ,
रिश्ते सागर जैसे भी !
पुनः आभार ,

मुकेश कुमार सिन्हा ने कहा… 31 मई 2010 को 5:17 pm

uss anaam rishte ko mera salam...:)

bahut khubsurati se aapne ukera hai........:) rishte ko........

ρяєєтii ने कहा… 31 मई 2010 को 5:25 pm

My Beloved Guruji always says,,,, "PYAAR KO PYAAR HI RAHNE DO KOI NAAM NA DO"....! Pyaar wo jazbaa hai jo sirf mehsus kiya ja sakta hai use samjhaya nahi ja sakta...!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा… 31 मई 2010 को 6:12 pm

ऐसे अनाम रिश्ते ज्यादा मजबूत होते हैं...सुन्दर रचना

sandeep sharma ने कहा… 4 जून 2010 को 9:19 pm

nice imotions...

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा… 7 जून 2010 को 5:47 pm

suman ji,
behad bhaawpurn rachna. samaj rishton mein jina chaahta hai, kyuki rishton mein koi jokhim nahin dikhta. lekin mann in sab se parey hota hai, jise rishte baandh hin nahin sakte wo bas jite hain inmein. bahut gahri aur sundar prastuti, badhai sweekaren.

 
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