दीप्ति मुस्कुराती हैं.....!
दुर्गा पूजा एवं विजयादशमी पर्व की मंगल कामनाओं के साथ प्रस्तुत है श्री दीपक शर्मा की कविताएँ- "ज़ुल्म कितना ही सबल हो,तम हो कितना ही प्...
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दीप्ति मुस्कुराती हैं.....!
दुर्गा पूजा एवं विजयादशमी पर्व की मंगल कामनाओं के साथ प्रस्तुत है श्री दीपक शर्मा की कविताएँ- "ज़ुल्म कितना ही सबल हो,तम हो कितना ही प्...
नज़्म:जब ज्ञान - दीप से मानव अज्ञान का तिमिर मिटाएगा ।
कितने बच्चे सोते हैं रोज़ रखकर पेट में लातें अपनी बना नहीं अभी कच्चा है कह देती है जब रोकर जननी । भोर हुए उठते हैं जब पाते हैं दो ही सिकी रो...
आपके आशीष से ,तालीम से और ज्ञान से उपदेश से ,उसूल से , सार और व्याख्यान से अप्रमाण जीवन को मिली परिधि नई,नव दिशा श्वेत मानस पटल पर स्वरूप वि...