वसंत लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
वसंत लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

वसंत आर्य की दो गज़लें वसंत आर्य की दो गज़लें

(एक) हवा में घुला हुआ ये जहर क्यों है फरेब के जैसा मेरा शहर क्यों है भोला दीखता है उसके चहरे जैसा- हालात साजिशों की तरह मगर क्यों है फूल भी ...

और जानिएं »
1:07 pm
 
Top